एक अभगा ना जाने कंहा कंहा भागा,
पर जंहा जंहा भी भागा,
सबने कहा, तू फिर से आ भागा |
Friday, April 9, 2010
Thursday, February 11, 2010
कौन बदल गया...
सत्यम शिवम् सुन्दरम के साथ सुबह हुआ करती , रंगोली आती, चित्रहार का इंतजार हुआ करता |
कभी कभी अमिताभ की १०- १२ साल पुरानी movie भी आ जाया करती |
समाचार दिन में एक बार आया करता , कभी शम्मी नारंग, कभी जे वी रमण तो कभी सलमा शुल्ताना नजर आया करती |
इन सब के लिए एक काला सा booster, एटिना और तारो से घिरा हुआ करता |
आज ज़माना डिश टीवी का है |
रंगोली और चित्रहार कंही पीछे छुट गए है , सिनेमा हाल से पहले अब movie टीवी पर आ जाती है |
सरला महेश्वरी की जगह अब खुबसूरत परियो ने ले ली है, जो लाल गोले और लाल तीरों के साथ घुमा करती है |
अब तो ना booster है और ना ही तारो का जंजाल |
कह पाना मुश्किल है की कौन बदल गया, हम, समय, या दोनों |
हा पर आज भी उन लोगो की कमी नहीं है जो, वाघले की दुनिया you tube पर खोजा करते है |
कभी कभी अमिताभ की १०- १२ साल पुरानी movie भी आ जाया करती |
समाचार दिन में एक बार आया करता , कभी शम्मी नारंग, कभी जे वी रमण तो कभी सलमा शुल्ताना नजर आया करती |
इन सब के लिए एक काला सा booster, एटिना और तारो से घिरा हुआ करता |
आज ज़माना डिश टीवी का है |
रंगोली और चित्रहार कंही पीछे छुट गए है , सिनेमा हाल से पहले अब movie टीवी पर आ जाती है |
सरला महेश्वरी की जगह अब खुबसूरत परियो ने ले ली है, जो लाल गोले और लाल तीरों के साथ घुमा करती है |
अब तो ना booster है और ना ही तारो का जंजाल |
कह पाना मुश्किल है की कौन बदल गया, हम, समय, या दोनों |
हा पर आज भी उन लोगो की कमी नहीं है जो, वाघले की दुनिया you tube पर खोजा करते है |
Thursday, January 28, 2010
वफादार कौम
किसी ने ठीक कहा है, जब तक कुत्ता पीछे ना पड़ जाये कुत्तो की तरह भागने का मतलब समझ नहीं आता |
मेरी भी दिमाग की बत्ती तभी जल पाई, जब दुनिया की सबसे वफादार कौम मेरे पीछे पड़ गयी |
पर ना जाने मैंने ऐसा क्या कह दिया था, की यह वफादार कौम मुझे दार दार करने पे आतुर हो गयी थी |
अरे भाई मैंने सिर्फ तो इतना कहा था, की देखो
मिया बीवी के गोद में कुत्ता और बच्चा आया के हवाले
मेरी भी दिमाग की बत्ती तभी जल पाई, जब दुनिया की सबसे वफादार कौम मेरे पीछे पड़ गयी |
पर ना जाने मैंने ऐसा क्या कह दिया था, की यह वफादार कौम मुझे दार दार करने पे आतुर हो गयी थी |
अरे भाई मैंने सिर्फ तो इतना कहा था, की देखो
मिया बीवी के गोद में कुत्ता और बच्चा आया के हवाले
Monday, January 25, 2010
२ दिनों का मौसम
ध्यान से सुनो क्या कोई गीत सुनाई दे रहा है ? क्या कोई भारत माता की जय और वन्दे मातरम गा रहा है ?
लगता है देशभक्ति का मौसम फिर से आ गया है, अरे भाई कोई तारीख देखो आज १५ है की २६
लगता है देशभक्ति का मौसम फिर से आ गया है, अरे भाई कोई तारीख देखो आज १५ है की २६
Sunday, November 15, 2009
मेरी मौत की ख़बर...
जैसे ही यह बात सामने आई की मैं मरने वाला हूँ, मुझसे ज्यादा परिवर्तन दूसरो मैं आने लगा|
ना ही मुझे अलादीन का खजाना मिलने वाला था, और न ही मैं बिल गेट्स की औलाद बनने वाला था|
पर परिवर्तन तो हो रहा था, जो मुझे दिखाए दे रहा था|
अब मैं अनपे भांजो का मामे से मामाजी हो गया था, ससुर का दामाद से बेटाजी हो चुका था |
वीक् end पर याद आने वाला भगवान अब मेरे घर वालो को रोज याद आने लगा था|
पडोसियो से भी रोज की नोक झोक खत्म होने लगी थी|
अब तो टिकेट खरीदने के लिए भी ज्यादा समय तक क़तर में नही खड़ा होना पड़ता था|
सरकार ने मुझ जैसो पर तरस खा कर मरने वालो के लिए एक अलग काउंटर खोल दिया था|
सारी चीजे वैसे ही होने लग गयी थी जैसी की होने चाहेयी थी, सारे काम समय पर खत्म होने लगे थे|
कभी कभी मैं सोचा करता की अगर मैं मर नही रहा होता तो क्या सब कुछ ऐसा ही होता जैसे की है|
तो कंही से जवाब आता की नही तुम्हे मरना ही पड़ेगा |
अब जब मैं मर गया हूँ तो सिर्फ़ उन दिनों को याद करना चाहता हूँ, जब मेरी मरने की ख़बर फ़ैल चुकी थी|
तब शायद जाके लोगो ने मेरी और मैंने अपनी कीमत पहचानी थी |
तोह क्या हम किसी कीमत तभी पहचानते जब वह मरने वाला होता है या मर चुका होता है ?????
ना ही मुझे अलादीन का खजाना मिलने वाला था, और न ही मैं बिल गेट्स की औलाद बनने वाला था|
पर परिवर्तन तो हो रहा था, जो मुझे दिखाए दे रहा था|
अब मैं अनपे भांजो का मामे से मामाजी हो गया था, ससुर का दामाद से बेटाजी हो चुका था |
वीक् end पर याद आने वाला भगवान अब मेरे घर वालो को रोज याद आने लगा था|
पडोसियो से भी रोज की नोक झोक खत्म होने लगी थी|
अब तो टिकेट खरीदने के लिए भी ज्यादा समय तक क़तर में नही खड़ा होना पड़ता था|
सरकार ने मुझ जैसो पर तरस खा कर मरने वालो के लिए एक अलग काउंटर खोल दिया था|
सारी चीजे वैसे ही होने लग गयी थी जैसी की होने चाहेयी थी, सारे काम समय पर खत्म होने लगे थे|
कभी कभी मैं सोचा करता की अगर मैं मर नही रहा होता तो क्या सब कुछ ऐसा ही होता जैसे की है|
तो कंही से जवाब आता की नही तुम्हे मरना ही पड़ेगा |
अब जब मैं मर गया हूँ तो सिर्फ़ उन दिनों को याद करना चाहता हूँ, जब मेरी मरने की ख़बर फ़ैल चुकी थी|
तब शायद जाके लोगो ने मेरी और मैंने अपनी कीमत पहचानी थी |
तोह क्या हम किसी कीमत तभी पहचानते जब वह मरने वाला होता है या मर चुका होता है ?????
Sunday, August 30, 2009
मंजील की तलाश
वह कमरे के किसी कोने में बैठकर मुझे ताडा करता
रह रह कर मेरा ध्यान अनपी ओ़र खीचा करता
जब मैं बेचैन होकर उसे तलाशा करता, तोह वह किसी कोने मैं बैठा मुस्कुराया करता
जब मैं मुस्कुराता तोह वह मुझ पर हंसा करता
वह आज भी मेरे आस पास ही हुआ करता है, पर शायद अब वह पहले से ज्यादा दिखा करता है
Wednesday, June 24, 2009
मैं मैं नही होता तो क्या होता?
रह रह कर एक बात दिमाग मे आ जाती है,
पता नही सिर्फ़ मेरे ही आती है, या सबके दिमागों मेंआती है।
बात बहुत ही साधारण सी है, बात यह है की
मैं मैं नही होता तो क्या होता ???????????
शायद मैं ये होता या मैं वोह हो जाता
अगर मैं ये होता तोह शायद ऐसा होता, अगर मैं वोह होता तोह शायद मैं वैसा होता
अच्छा है की मैं, मैं ही हूँ कोई और नही, वरना पता नही क्या हो जाता
पता नही सिर्फ़ मेरे ही आती है, या सबके दिमागों मेंआती है।
बात बहुत ही साधारण सी है, बात यह है की
मैं मैं नही होता तो क्या होता ???????????
शायद मैं ये होता या मैं वोह हो जाता
अगर मैं ये होता तोह शायद ऐसा होता, अगर मैं वोह होता तोह शायद मैं वैसा होता
अच्छा है की मैं, मैं ही हूँ कोई और नही, वरना पता नही क्या हो जाता
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