Sunday, November 15, 2009

मेरी मौत की ख़बर...

जैसे ही यह बात सामने आई की मैं मरने वाला हूँ, मुझसे ज्यादा परिवर्तन दूसरो मैं आने लगा|
ना ही मुझे अलादीन का खजाना मिलने वाला था, और न ही मैं बिल गेट्स की औलाद बनने वाला था|
पर परिवर्तन तो हो रहा था, जो मुझे दिखाए दे रहा था|
अब मैं अनपे भांजो का मामे से मामाजी हो गया था, ससुर का दामाद से बेटाजी हो चुका था |
वीक् end पर याद आने वाला भगवान अब मेरे घर वालो को रोज याद आने लगा था|
पडोसियो से भी रोज की नोक झोक खत्म होने लगी थी|
अब तो टिकेट खरीदने के लिए भी ज्यादा समय तक क़तर में नही खड़ा होना पड़ता था|
सरकार ने मुझ जैसो पर तरस खा कर मरने वालो के लिए एक अलग काउंटर खोल दिया था|
सारी चीजे वैसे ही होने लग गयी थी जैसी की होने चाहेयी थी, सारे काम समय पर खत्म होने लगे थे|
कभी कभी मैं सोचा करता की अगर मैं मर नही रहा होता तो क्या सब कुछ ऐसा ही होता जैसे की है|
तो कंही से जवाब आता की नही तुम्हे मरना ही पड़ेगा |
अब जब मैं मर गया हूँ तो सिर्फ़ उन दिनों को याद करना चाहता हूँ, जब मेरी मरने की ख़बर फ़ैल चुकी थी|
तब शायद जाके लोगो ने मेरी और मैंने अपनी कीमत पहचानी थी |

तोह क्या हम किसी कीमत तभी पहचानते जब वह मरने वाला होता है या मर चुका होता है ?????


Sunday, August 30, 2009

मंजील की तलाश

वह कमरे के किसी कोने में बैठकर मुझे ताडा करता

रह रह कर मेरा ध्यान अनपी ओ़र खीचा करता

जब मैं बेचैन होकर उसे तलाशा करता, तोह वह किसी कोने मैं बैठा मुस्कुराया करता

जब मैं मुस्कुराता तोह वह मुझ पर हंसा करता

वह आज भी मेरे आस पास ही हुआ करता है, पर शायद अब पहले से ज्यादा दिखा करता है

Wednesday, June 24, 2009

मैं मैं नही होता तो क्या होता?

रह रह कर एक बात दिमाग मे आ जाती है,
पता नही सिर्फ़ मेरे ही आती है, या सबके दिमागों मेंआती है।
बात बहुत ही साधारण सी है, बात यह है की
मैं मैं नही होता तो क्या होता ???????????
शायद मैं ये होता या मैं वोह हो जाता
अगर मैं ये होता तोह शायद ऐसा होता, अगर मैं वोह होता तोह शायद मैं वैसा होता
अच्छा है की मैं, मैं ही हूँ कोई और नही, वरना पता नही क्या हो जाता

Wednesday, May 6, 2009

हर मित्रता के पीछे, स्वार्थ छुपा होता है|
हर भूलने के पीछे, याद छुपा होता है|
हर सीख के पीछे, भूल छुपा होता है |
हर छमा के पीछे, क्रोध छुपा होता है |
हर जरुरत के पीछे, लाचारी छुपा होता है|
हर प्यार के पीछे, आभाव छुपा होता है|
पर कितनो के पास इतना समय छुपा होता है, जो छुपे हुए को पहचाने|

Monday, April 13, 2009

रोको मत, जाने दो|
रोको, मत जाने दो|
एक छोटा सा व्याकरण का खेल अर्थ बदल देता है|

Thursday, April 2, 2009

अगर आप आश्चर्यवाचक (!) है, तो आपको जिन्दगी मैं अलपविरम (,) की जरुरत होती है|
पूर्णविराम (|) की नही, अपीतु आप की जिन्दगी दूसरो के लिए हमेशा ही प्रशंवाचक (?) होती है|

Wednesday, April 1, 2009

यंहा हर कोई पहलवान,
पर समय सबसे बड़ा बलवान|
ना चंद्रमुखी ना पारो,
मौज मैं रहो यारो|

Tuesday, March 31, 2009

दूर के फायदे के लिए, नजदीक का नुकसान नही देखा जाता है|
पर ऐसे फायदे का क्या लाभ, जो नुकसानों के अम्बार पर मिले|