Monday, April 13, 2009

रोको मत, जाने दो|
रोको, मत जाने दो|
एक छोटा सा व्याकरण का खेल अर्थ बदल देता है|

Thursday, April 2, 2009

अगर आप आश्चर्यवाचक (!) है, तो आपको जिन्दगी मैं अलपविरम (,) की जरुरत होती है|
पूर्णविराम (|) की नही, अपीतु आप की जिन्दगी दूसरो के लिए हमेशा ही प्रशंवाचक (?) होती है|

Wednesday, April 1, 2009

यंहा हर कोई पहलवान,
पर समय सबसे बड़ा बलवान|
ना चंद्रमुखी ना पारो,
मौज मैं रहो यारो|