जैसे ही यह बात सामने आई की मैं मरने वाला हूँ, मुझसे ज्यादा परिवर्तन दूसरो मैं आने लगा|
ना ही मुझे अलादीन का खजाना मिलने वाला था, और न ही मैं बिल गेट्स की औलाद बनने वाला था|
पर परिवर्तन तो हो रहा था, जो मुझे दिखाए दे रहा था|
अब मैं अनपे भांजो का मामे से मामाजी हो गया था, ससुर का दामाद से बेटाजी हो चुका था |
वीक् end पर याद आने वाला भगवान अब मेरे घर वालो को रोज याद आने लगा था|
पडोसियो से भी रोज की नोक झोक खत्म होने लगी थी|
अब तो टिकेट खरीदने के लिए भी ज्यादा समय तक क़तर में नही खड़ा होना पड़ता था|
सरकार ने मुझ जैसो पर तरस खा कर मरने वालो के लिए एक अलग काउंटर खोल दिया था|
सारी चीजे वैसे ही होने लग गयी थी जैसी की होने चाहेयी थी, सारे काम समय पर खत्म होने लगे थे|
कभी कभी मैं सोचा करता की अगर मैं मर नही रहा होता तो क्या सब कुछ ऐसा ही होता जैसे की है|
तो कंही से जवाब आता की नही तुम्हे मरना ही पड़ेगा |
अब जब मैं मर गया हूँ तो सिर्फ़ उन दिनों को याद करना चाहता हूँ, जब मेरी मरने की ख़बर फ़ैल चुकी थी|
तब शायद जाके लोगो ने मेरी और मैंने अपनी कीमत पहचानी थी |
तोह क्या हम किसी कीमत तभी पहचानते जब वह मरने वाला होता है या मर चुका होता है ?????
Sunday, November 15, 2009
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